गोरखपुर

महानगर के बैंकर रवि द्विवेदी की बनाई हुई पेंटिंग अब बढ़ाएगी राष्ट्रपति भवन की शोभा

अरविन्द श्रीवास्तव
गोरखपुरः पेशे से बैंक अधिकारी महानगर निवासी रवि द्विवेदी की बनाई हुई मधुबनी पेंटिंग अब राष्‍ट्रपति भवन में शोभा बढ़ाने के लिए तैयार है। आज दो दिवसीय यात्रा पर गोरखपुर पंहुचे महामहिम को रवि द्विवेदी द्वारा बनाई गयी कृति ‘सीता स्‍वयंवर’ भेंट की जाएगी। गोरक्षपीठ द्वारा संचालित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 86वें संस्‍थापक सप्‍ताह समारोह के 10 दिसंबर को होने वाले मुख्‍य महोत्‍सव में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्‍य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे।

हालांकि उनके स्‍वागत के लिए पहले से ही तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।लेकिन, जिला और मंदिर प्रशासन ने ये तय किया कि उन्‍हें ऐसी भेंट दी जाए, जो कुछ अलग और खास हो। ऐसे में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की पहल पर महापौर सीताराम जायसवाल ने रवि द्विवेदी के घर जाकर उनसे भेंट की। पूर्वांचल बैंक में वरिष्‍ठ अधिकारी रवि द्विवेदी ने भी गोरक्षपीठाधीश्‍वर की इच्‍छा का मान रखते हुए दो पेंटिंग महापौर को सौंप दीं।

इससे पहले भी श्री द्विवेदी द्वारा बनाई गई कृतियों को तमाम गणमान्य लोगों को भेंट किया जा चुका है। इनमे सीएम योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल राम नाईक, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, लोक गायिका मालिनी अवस्थी सहित तमाम हैं।

उनके बनाये चित्रकला के नमूने पूर्वांचल की मिटटी में कदम रखने वाले हर बड़ी शख्सियतों के पास है।पर्यावरण के प्रति अटूट प्रेम के पुजारी इस दम्पति का बैंकर होने के बाद भी अपने इन 600 बच्चों को नियमित सुबह शाम डेढ़ से दो घण्टे समय देना काबिले तारीफ है।

बता दें कि बैंकर श्री द्विवेदी को केवल पेंटिंग में महारत नहीं हासिल है बल्कि लगातार बीते चार दशकों से बोंसाई गमलों में संजोने के शौक के कारण ‘मिस्‍टर बोनसाई’ के नाम से भी मशहूर हैं। पूर्वांचल बैंक में अफसर रवि द्विवेदी महानगर के गोरखनाथ एरिया के दस नम्बर बोरिंग के रिहाइशी है और अपने आशियाने के अहाते में रुद्राक्ष समेत लगभग 600 दुर्लभ पौधों के बोनसाई का अनोखा संसार समेटे है। जिन्हें उनके शुभचिंतको द्वारा मिस्टर बोनसाई के नाम से भी पुकारा जाता है।

इनके दुर्लभ संसार में केवल गोरखपुर में पाया जाने वाला और बिलुप्त हो चूका पनियाला, खिरनी, अमड़ा, रुद्राक्ष, चिनार, चीकू,22 वर्षीय इमली, कहवा(कोको), बरगद सफ़ेद और पीला, पीपल, गूलर, जामुन की काली और बंगाली जामुन की सफ़ेद वैरायटी, सहतुत 2 किस्म की और आयुर्वेदिक मौलश्री जैसी अन्य कई और औषधिक बोनसाई पौधे है जिनका नाम गिनाना अपर्याप्त है।

कहते है कि सभी पौधे किसी न किसी नक्षत्र से जुड़ाव रखते है और इन्होने अपने वाटिका को नक्षत्र वाटिका का रूप देने की कोशिश किया है। भारतीय ज्योतिष परम्परा के अनुसार 27 नक्षत्र है जिनसे जुड़ा हुआ एक पौधा जरूर है। दैनिक जीवन में रोगों से ग्रसित लोगो को इन पौधों से लाभ मिल सकता है। अलग अलग वृक्षो के माहात्म्य और सबके पूजन की विधियां भी भिन्न है।

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