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राम मंदिर निर्माण के लिए 21 फरवरी की तारीख तय, योगी भी पहुंचे प्रयागराज

प्रयागराज। वीएचपी की अब तक की सबसे बड़ी धर्म संसद कुंभ में विदेश में रह रहे संतों को भी आमंत्रित किया गया है। वनवासी क्षेत्रों से लेकर कश्मीर, उत्तराखंड और केरल-तमिलनाडु के संतों को भी इसमें बुलाया गया है। वीएचपी की कोशिश राम मंदिर के मुद्दे पर पूरे देश के संतों को एक मंच पर लाना है ताकि उनसे ऐसा मार्गदर्शन मिले जो आगामी आंदोलन का रास्ता तय कर सके।

वीएचपी के उपाध्यक्ष जीवेश्वर मिश्र ने केन्द्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के लिए अधिग्रहीत भूमि राम जन्मभूमि न्यास को लौटाने के लिए दी गई अर्जी को राम मंदिर निर्माण के लिए पहला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे आंदोलन को गति मिलेगी, लेकिन हमें तो 67 एकड़ भूमि चाहिए। इसमें 2.7 एकड़ भूमि भी शामिल है, जिस पर रामलला विराजमान हैं।

प्रयागराज में चल रहे कुंभ के दौरान राम मंदिर निर्माण का मुद्दा छाया हुआ है। विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) की तरफ से गुरुवार से शुरू हो रही धर्म संसद में संगम नगरी से साधु-संत एक सुर में मंदिर की आवाज बुलंद करने जा रहे हैं। इस बीच संघ प्रमुख मोहन भागवत और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी कुंभ नगरी में हैं। वीएचपी की धर्म संसद से पहले गुरुवार सुबह दोनों के बीच मुलाकात हुई है।
दो दिन तक चलने वाली धर्म संसद में देशभर के तकरीबन 5,000 साधु-संत जुट रहे हैं। वीएचपी ने इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की हैं। इस आयोजन में वीएचपी और संघ के बड़े पदाधिकारी भी पहुंच रहे हैं। वीएचपी के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार और अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे समेत वीएचपी की पूरी कार्यकारिणी कुंभ में मौजूद है।

संतों से मिले योगी :

आरएसएस प्रमुख के अलावा भैयाजी जोशी और दत्तात्रेय होसबोले भी धर्म संसद में शिरकत कर रहे हैं। इस बीच झूंसी स्थित आरएसएस के कार्यालय में सरसंघचालक मोहन भागवत और सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच मुलाकात हुई है। सीएम योगी कुंभ क्षेत्र के सेक्टर-15 में पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से भी मिलने के लिए पहुंचे। सेक्टर-15 में ही जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी और राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास से मुलाकात करने के बाद सीएम योगी गोरखपुर के लिए रवाना हो गए।

राम मंदिर पर प्रस्ताव : 

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश के तकरीबन हर जिले से संतों के प्रतिनिधित्व पर वीएचपी ने ताकत झोंकी है। शाम पांच बजे तक धर्म संसद के पहले दिन की कार्यवाही चलेगी। बताया जा रहा है कि वीएचपी की धर्म संसद के पहले दिन केरल के सबरीमाला मंदिर विवाद, धर्मांतरण का मुद्दा और हिंदुओं की संस्कृति पर हो रहे हमले जैसे मसलों पर मंथन होगा। वहीं, दूसरे दिन यानी 1 फरवरी को राम मंदिर का मुद्दा रखा जाएगा। इस दौरान मंदिर मुद्दे पर एक प्रस्ताव भी पास किया जा सकता है।

वीएचपी की धर्म संसद से इतर प्रयागराज में संतों की धर्म संसद के दौरान ऐलान किया गया है कि संत समाज के लोग अगले महीने प्रयाग से अयोध्या के लिए कूच करेंगे। ‘परमधर्म संसद’ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मंदिर निर्माण के लिए 21 फरवरी की तारीख तय की गई है। कोर्ट के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा गया है कि खेद का विषय है कि कुत्ते तक को तत्काल न्याय दिलाने वाले राम के देश में रामजन्मभूमि के मुकदमे को न्याय नहीं मिल रहा है।

परमधर्म संसद की अगुआई कर रहे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, ‘हम अयोध्या में 21 फरवरी 2019 को राम मंदिर की नींव रखेंगे। हम कोर्ट के किसी भी आदेश का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। जब तक सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के आदेश को खारिज नहीं कर देता, तब तक यह लागू है। वहां रामलला विराजमान हैं, वह जन्मभूमि है।’

पीएम मोदी के इंटरव्यू का जिक्र करते हुए विज्ञप्ति में कहा गया, ‘पीएम मोदी ने अपने साक्षात्कार में कहा है कि न्याय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब उनकी बारी आएगी तो वह अपनी भूमिका निभाएंगे। वह अपने वचन पर स्थिर नहीं रह सके और उन्होंने रामजन्मभूमि विवाद की न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करवाई है, जिसमें गैर-विवादित जमीन को उसके मालिकों को लौटाने की बात कही गई है। याचिका में कहा गया है कि 48 एकड़ भूमि रामजन्मभूमि न्यास की है जबकि सच्चाई यह है कि एक एकड़ भूमि के अलावा सारी जमीन उत्तर प्रदेश सरकार की है, जो रामायण पार्क के लिए अधिग्रहीत की गई थी।

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