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गोरखपुर में अंतरिम बजट को किसी ने कहा ‘जुमलेबाजी’ तो किसी ने कहा ‘शानदार’

अरविन्द श्रीवास्तव

गोरखपुर: केंद्र सरकार द्वारा आज संसद में पेश किये गए बजट को जहाँ कई राजनैतिक पार्टियों ने चुनावी बजट करार दिया है वहीँ आम जनमानस भी इसे लोक लुभावन बजट कहने से नहीं चुके। ऐसे में फाइनल रिपोर्ट ने सीएम सिटी गोरखपुर के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वालो के विचार जानने की कोशिश की।

  1. इस बजट पर अमल भी हो तो बेहतर होगा – प्रतिभा पांडेय (गोरखपुर विश्वविद्यालय की छात्रा) 

किसानो के अच्छे दिन लौट आये है। उन्हें आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए हर साल 6 हजार रुपये की वित्तीय सहायता भी एलान किया। असंगठित मजदूरों के लिए सरकार ने तीन हजार रुपये पेंशन की सौगात दी है , गैस की कीमतों को घटाने से भी सभी वर्गों को राहत मिलेगा। बजट की टाइमिंग को लेकर कहा जा सकता है की यह बजट लोक लुभावन है लेकिन कुल मिलाकर मोदी सरकार का यह अंतरिम बजट सिर्फ और सिर्फ लोक लुभावन नहीं बल्कि दमदार और गरीब, किसान और माध्यम वर्ग के लोगो के लिए रहत वाला बजट रहा। अब इस पर अमल भी हो तो बेहतर होगा।

  1. सरकार ने अपने अंतरिम बजट को राजनैतिक दायरे में समेट दिया – प्रो अजेय कुमार गुप्ता (वाणिज्य विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय) 

भाजपा सरकार के कार्यकाल के आखिरी वर्ष में किसान, मजदूरों को ढेर सारे खैरात देकर, यहाँ तक कि किसानो को 6 हजार का दो हजार की पेशगी देकर सरकार ने अपने अंतरिम बजट को राजनैतिक दायरे में समेट दिया। यह तथ्य इससे भी सिद्ध होता है कि दीर्घकालीन विकास के श्रोत जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े व छोटे उद्योग, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य क़े लिए कोई प्रावधान ही नही है। कॉर्पोरेट टैक्स पर कोई छूट न देकर व्यापक उद्योग धंधो को हतोत्साहित ही किया गया है। कहा जा सकता है कि जीएसटी, आयकर, महिलाओं, पशुपालन कर्जे पर छूट, आयुष्मान, उज्जवला योजना तथा मनरेगा क़े लिए 60 हजार करोड़ का प्रावधान पिछली योजना का विस्तारीकरण है।

  1. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को गायब कर दिया सरकार ने – राम मूर्ती (किसान)  

यह बजट पूरी तरह से चुनाव को देखते हुए तैयार किया गया है। किसानो की आय दुगनी करने का इनका वायदा पिछले दिनों से ही रहा है जिसको पूरा नहीं कर पाये  और अभी तक तो यही नहीं तय है कि किसान की आय कितनी है। यदि आज किसान की आय 5 हजार है तभी तो दुगनी आय दस हजार होगी। दूसरी बात कि किसान सम्मान योजना , मोदी जी ला रहे है उसमे किसानो को पांच सौ रुपये देने की बात कर रहे है तो यह बताये कि आज कि समय में पांच सौ रुपये से क्या होने वाला है , इसमें तो गैस सिलिंडर ही नहीं मिलेगा। यह झूठ का एक पुलिंदा खड़ा किया गया है। पिछले दिनों इन्होने कहा था कि सरकार फ्री में बिजली कनेक्शन देगी लेकिन सब्सिडी का पैसा हमारे खाते से ले ले रहे है , इतना ही नहीं बिजली के बिल में 50 रुपये अलग से जोड़ लिया जा रहा है। स्वामीनाथन आयोग को अपनी रिपोर्ट से गायब कर दिया है जबकि इसके पहले कहा करते थे कि स्वामीनाथन आयोग को हम लागू करेंगे। यह बजट एक छलावा है , पूरी तरह से चुनावी बजट है।

  1. यह एक आखिरी जुमले वाला बजट है – डा सुरहिता करीम (कांग्रेस नेत्री व स्त्री रोग विशेषज्ञ) 

सरकार ने पिछले साढ़े चार सालो में सिर्फ जुमलों की बौछार की है ऐसे में आज के बजट को कहा जा सकता है कि यह एक आखिरी जुमले वाला बजट है। पार्लियामेंट के भीतर इलेक्शन रैली की तरह बजट का सम्बोधन चल रहा था। गरीब जनता फिर एक बार सरकार के झांसे में जाने वाली है , आयकर की छूट के मामले में ढाई लाख के जगह पांच लाख की जो घोषणा की गयी है , वह एक भ्रम है क्योकि पांच लाख तक की आय वालो को साढ़े बारह हजार रुपये तक का रिबेट मिलेगा न कि पूरे पांच लाख पर आय कर की छूट मिलने वाली है। सच तो यह है की यदि किसी की इनकम साढ़े पांच लाख हो जाता है तो उसे ढाई लाख से लेकर पांच लाख तक का टैक्स भरना पडेगा, जैसा की पहले से चलता चला आ रह है।

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