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गोरखपुर ने आज याद किया चौरीचौरा कांड, मनाई 97वीं बरसी

राधेश्याम पांडेय / यशोदानन्द सिँह

 गोरखपुर। चौरीचौरा के वीरों ने जालियां वाला बाग कांड की तरह गोली नही खाई थी बल्कि यहां के लोगो ने थाने में घुस कर अंग्रेजी हुकूमत को ही जिंदा जला दिया था। ये बातें पूर्व ले० जरनल व पूर्व अध्यक्ष जेपीसी भारत सरकार श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने चौरीचौरा कांड की बरसी पर कही।

त्रिपाठी ने कहा कि चौरीचौरा कांड एक ऐतिहासिक कांड था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्मारक समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जेबी महाजन डिग्री कालेज के प्रबधंक ईश्वरचंद जायसवाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों के द्वारा देश की आजादी में किये गए योगदान को नही भूलना चाहिए। चौरीचौरा के लोगो ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला कर रख दिया था। देश की आजादी में चौरीचौरा कांड ने महत्तव पूर्ण भूमिका निभाई थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता चौरीचौरा की उपजिलाधिकारी अधिकारी सरनीत कौर ब्रोका, नगर पंचायत मुंडेरा बाजार के पूर्व चेयरमैन व वर्तमान चेयरमैन प्रतिनिधि ज्योति प्रकाश गुप्ता, क्षेत्राधिकारी चौरीचौरा योगेंद्र कृष्ण नारायण, तहसीलदार रत्नेश त्रिपाठी, चौरीचौरा थानेदार नीरज रॉय, राकेश त्रिपाठी, राजन मद्देशिया, सत्येंद्र कुमार पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय, स्वतंत्रा संग्राम सेनानी के परिजन समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम का आयोजन राम नयन त्रिपाठी व संचालन गणेश दत्त शुक्ल ने किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम से पूर्व दो बजे शहीद स्मारक पर ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण के बाद पुलिस ने शहीदो को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सेंट्रल एकेडमी स्कूल के बच्चो ने इस अवसर पर देश भक्ति गीत प्रस्तुत किया जिस पर ईश्वरचंद जायसवाल और ज्योति प्रकाश गुप्ता ने  पुरस्कार देकर बच्चो का उत्साह वर्धन किया।

क्या है चौरीचौरा कांड

गोरखपुर जनपद से करीब पच्चीस किलोमीटर दूर एक कस्बा है चौरीचौरा, जहाँ 4 फ़रवरी 1922 को भारतीयों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी थी। जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मचारी जिन्दा जल के मर गए थे। इस घटना को चौरीचौरा कांड के नाम से जाना जाता है। इसके परिणाम स्वरूप महात्मा गांधीजी ने कहा था कि हिंसा होने के कारण असहयोग आन्दोलन उपयुक्त नहीं रह गया है और उसे वापस ले लिया था। चौरी-चौरा कांड के अभियुक्तों का मुक़दमा पंडित मदन मोहन मालवीय ने लड़ा और उन्हें बचा ले जाना उनकी एक बड़ी सफलता थी। कांड में 19 लोगो को फांसी की सजा हुई थी। उन्ही शहीदों की याद में शहीद स्मारक बना है और हर वर्ष चौरीचौरा कांड की बरसी मनाया जाता है।

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