गोरखपुर

लोक सभा चुनाव 2019: सुनील सिंह संतकबीरनगर से उतर सकते हैं मैदान में, 11 को हो सकती है औपचारिक घोषणा

राकेश मिश्रा
गोरखपुर: कभी योगी आदित्यनाथ की परछाई रहे और और आज योगी के शासन काल में ही जेल में रासुका के अंतर्गत निरुद्ध रहने के बाद बाहर आये सुनील सिंह 2019 में होने वाले आम चुनाव में संतकबीरनगर सीट से हिन्दू युवा वाहिनी (भारत) के टिकट पर मैदान में ताल ठोंक सकते हैं। सूत्रों की मानें तो सुनील सिंह ने सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर के बगल की सीट संतकबीरनगर से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली है।

बीते दिनों सोशल मीडिया खास कर फेसबुक के माध्यम से सुनील सिंह के चुनाव लड़ने सम्बंधित पोस्टर भी खूब वायरल हुए। अगर विश्वस्त सूत्रों पर भरोसा किया जाए आगामी 11 तारीख को सन्तकबीर में होने वाले हिन्दू युवा वाहिनी (भारत) की बैठक में सुनील सिंह की उम्मीदवारी को लेकर फैसला हो भी जायेगा। सुनील सिंह ने जेल से बाहर आने के बाद से ही अपने इरादे पूरी तरह से स्पष्ट कर दिए थे।

फाइनल रिपोर्ट से ही एक विशेष बातचीत में सुनील सिंह ने कहा था कि फैज़ाबाद से लेकर बिहार बॉर्डर तक की सभी सीटों पर वो योगी आदित्यनाथ की पार्टी भाजपा को जीरो पर आउट करने के लिए कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। सुनील सिंह इस बीच काफी सक्रिय हैं। वो भाजपा को हराने के लिए अन्य पार्टियों से गठबंधन की बात को भी अस्वीकार नहीं कर रहे हैं।

पार्टी सूत्रों के अनुसार खलीलाबाद लोकसभा में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह युवाओं की पहली पसंद है। उनको लेकर युवाओं में खासा जोश देखा जा रहा है। संगठन का मानना है कि खलीलाबाद की ज़मीनी हक़ीक़त से सुनील सिंह अच्छी तरह वाकिफ़ हैं। संगठन के लोगों का कहना है कि निश्चित तौर पर 2019 में सुनील सिंह खलीलाबाद लोकसभा से जनता की उम्मीदों पर खड़े होकर ताल ठोकेंगे।

गौरतलब है कि कभी गोरक्षपीठाधीस्वर योगी आदित्यनाथ के खासम खास सिपहसालार रहे सुनील सिंह को बीते वर्ष जुलाई महीने में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। तत्कालीन हिन्दू युवा वाहिनी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह को पुलिस ने बीते 31 जुलाई को समर्थकों के साथ गिरफ्तार किया था।

बाद में रासुका में निरुद्ध और तब जिला जेल गोरखपुर में बंद हिंदू युवा वाहिनी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह व हिंदू युवा वाहिनी भारत के महानगर संयोजक चंदन विश्वकर्मा सहित दो अन्य समर्थकों को जेल प्रशासन ने लखनऊ जेल में शिफ्ट कर दिया था।

सदर सांसद प्रवीण निषाद भी मिले थे सुनील सिंह से

सुनील सिंह जब गोरखपुर जेल में बंद थे उस दौरान सदर सांसद प्रवीण निषाद ने भी उनसे जेल के भीतर मुलाकात की थी। सुनील और सांसद प्रवीण के बीच जिला जेल में करीब 45 मिनट बातचीत हुई। इस मुलाकात को लेकर गोरखपुर के सियासी हल्‍कों में तरह-तरह की चर्चाएं हुई थी।

खुद को बेकसूर बताते रहे हैं सुनील सिंह

पहले दिन से ही सुनील सिंह सोशल मीडिया के माध्यम से खुद को बेकसूर बताते रहे हैं। अपने खिलाफ पांचवा मुकदमा दर्ज होने के बाद सुनील सिंह के फेसबुक प्रोफाइल पर एक शायरी पोस्ट कर यह बताया गया है कि ये सारे मुकदमे झूठे हैं और दमन की यह कार्यवाई ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाएगी। जानकारी के अनुसार सुनील सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनका फेसबुक प्रोफाइल उनके छोटे भाई हैंडल करते हैं। इससे पहले उनकी पत्नी भी एक पोस्ट डाल अपने पति को निर्दोष बता चुकी हैं।

कभी थे योगी के परछाई

बता दें की कभी योगी आदित्यनाथ की परछाई रह चुके सुनील सिंह और गोरक्षपीठाधीस्वर के बीच मनमुटाव की नीव 2017 में हुए विधान सभा चुनाव के ठीक पहले पड़ी। एक ज़माने में योगी के खासमखास रहे सुनील सिंह विधान सभा चुनाव में गोरखपुर ग्रामीण सीट से टिकट की उम्मीद लगाए बैठे थे। टिकट उन्हें मिला नहीं। वहीँ से दोनों के रास्ते भी अलग ही गए।

सुनील सिंह ने तभी बगावती तेवर अपना लिए। उन्होंने योगी आदित्यनाथ के मना करने के बाद भी युवा वाहिनी के उम्मीदवार घोषित कर दिये थे। जिसके बाद योगी आदित्यनाथ के कहने पर हिन्दू युवा वाहिनी से सुनील सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

हालांकि जब योगी मुख्यमंत्री बन वापस गोरखपुर लौटे तो सुनील सिंह अपने गुरु का आशीर्वाद लेने गोरखनाथ मंदिर पंहुच गए। गुरु पूर्णिमा के पर्व पर उन्होंने योगी का आशीर्वाद लेकर यह ऐलान भी किया योगी उनके गुरु थे, हैं, और रहेंगे।

ऐसे समय में जब ऐसा लग रहा था कि योगी और उनके इस पुराने सेनापति के बीच सबकुछ ठीक हो गया है, तभी सुनील सिंह ने योगी द्वारा स्थापित हिन्दू युवा वाहिनी को दो फाड़ करते हुए हिन्दू युवा वाहिनी भारत नामक एक संगठन बना लिया। इस नए संगठन में सुनील सिंह के अलावा योगी आदित्यनाथ की हिंदू युवा वाहिनी के कई कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सुनील सिंह के इस कदम को योगी आदित्यनाथ के खिलाफ खुली बगावत के रूप में देखा गया। 13 मई को अपने समर्थकों के साथ लखनऊ में बैठक करने के बाद सुनील सिंह ने नया संगठन बनाने का फैसला लिया था।

सुनील सिंह ने संगठन बनाने के बाद गोरखपुर में इसका एक सम्मलेन में भी किया था। बताया जाता है कि यह सम्मलेन काफी सफल साबित हुआ था और यह माना जाने लगा था कि यह संगठन आने वाले वक़्त में योगी के गढ़ में ही मुख्यमंत्री को चुनौती देने का इरादा रखता है।

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