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बीते 20 सालों में इन 11 सीटों पर नहीं खुला है सपा-बसपा का खाता

राकेश मिश्रा

लखनऊ: लोक सभा चुनाव 2019 को लेकर सरगर्मियां बढ़ चुकी हैं। पार्टियों ने कमर कस अब अपनी चुनावी तैयारियों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों सपा, बसपा ने पहले ही गठबंधन की घोषणा कर दी है। इस गठबंधन में अजित सिंह की राष्ट्रीय लोक दल भी शामिल है। यह माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में यह गठबंधन, भाजपा और कांग्रेस पर भारी पड़ेगा। लेकिन हम आपको बता दें कि प्रदेश में 11 ऐसी सीट हैं जहाँ से सपा या बसपा दोनों पार्टियां बीते चार लोक सभा चुनाव में जीत दर्ज नहीं कर पायी हैं।

यह 11 सीट हैं-पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बागपत, हाथरस, मथुरा, बरेली और पीलीभीत, पूर्वी उत्तर प्रदेश के अमेठी, राय बरेली, कुशीनगर और वाराणसी और सेंट्रल यूपी के लखनऊ और कानपुर।  यह 11 सीट या तो भाजपा के खाते में गयी हैं या फिर यहाँ से कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। सपा बसपा के लिए यह बात राहत दे सकती है कि इस बार गठबंधन में उनके साथी दल आरएलडी ने इन सीटों में से कुछ पर जीत दर्ज जरूर की है।

अमेठी तो गाँधी परिवार का गढ़ रहा ही है और 1999 से लगातार यहाँ से या तो सोनिया गाँधी या उनके पुत्र राहुल गाँधी सांसद रहे हैं। 1999 में यहाँ से सोनिया गाँधी ने जीत दर्ज की थी तो वहीँ 2004 से लगातार राहुल गाँधी यहाँ से जीत दर्ज कर संसद पंहुच रहे हैं। वर्तमान में सोनिया गाँधी अमेठी के बगल वाली सीट रायबरेली का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। सोनिया भी इस सीट पर 2004 से लगातार जीत दर्ज कर रही हैं।

अगर हम बात करें प्रदेश की एक और वीआईपी सीट वाराणसी के बारे में तो यहाँ से 1999 से 2014 तक तीन बार भाजपा ने और एक बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। वर्तमान में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिनिधित्व किये जा रहे इस सीट पर 2004 में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। मोदी के पहले 2009 में वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी यहाँ से सांसद थे। कांग्रेस के राजेश कुमार मिश्रा ने 2004 में यहाँ से जीत दर्ज की थी। उससे पहले 1999 में यहाँ से भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल ने जीत दर्ज की थी।

सूबे की एक और VIP सीट लखनऊ भी सपा-बसपा के लिए दुर्भाग्यशाली ही रहा है। यहाँ से 1999 से लेकर 2014 तक भाजपा ही जीत दर्ज करती रही है। वर्तमान में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह यहाँ से सांसद हैं। पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस सीट से 1999 और 2004 में जीत दर्ज की थी। 2009 में वाजपेयी द्वारा सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने के बाद  उनके शिष्य लाल जी टंडन ने जीत दर्ज की थी।

पीलीभीत में भी 1999 से सपा या बसपा किसी भी पार्टी को जीत नसीब नहीं हुई है। केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी ने इस सीट पर 1999, 2004, और 2014 तीन बार लगातार जीत दर्ज किया। 2009 में उन्होंने यह सीट अपने बेटे वरुण गाँधी के लिए खाली छोड़ दी थी। वरुण ने यहाँ से 2009 में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वरुण गाँधी वर्तमान में सूबे के सुल्तानपुर सीट से सांसद हैं।

बागपत एक ऐसी सीट है जहाँ 1999 से अब तक जीत दर्ज नहीं कर पाने के बाद भी इस बार सपा-बसपा के चेहरे पर मुस्कान ला देगा। कारण यहाँ से राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) का लगातार जीत दर्ज करना है। बता दें कि 2019 के चुनाव में सपा-बसपा आरएलडी के  गठबंधन कर चुनावी मैदान में उतरेंगी। बागपत से आरएलडी नेता अजीत सिंह ने 1999, 2004 और 2009 में लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। 2014 में मोदी लहर में यह सीट भाजपा के सत्यपाल सिंह ने जीत ली।

अगर बात कानपुर की करें तो 2014 में यहाँ से भापा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने जीत दर्ज की थी। उससे पहले 2009 में यहाँ से कांग्रेस के श्री प्रकाश जायसवाल सांसद थे। श्री जायसवाल ने 1999 से लेकर 2009 तक लगातार तीन बार कानपुर सीट से जीत दर्ज की थी। यही हाल हाथरस, मथुरा और बरेली सीटों का है जहाँ से या तो कांग्रेस या आरएलडी अथवा भाजपा जीत दर्ज करती रही हैं। बीते 20 वर्षों में हुए चार लोक सभा चुनावों में सपा-बसपा जैसी पार्टियों का इन सीटों पर खाता ही नहीं खुला।

बात करें पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक और हाई प्रोफाइल सीट कुशीनगर की तो यहाँ भी बीते 20 सालोँ में सपा-बसपा के हाथों निराशा ही लगी है। कुशीनगर से वर्तमान में भाजपा के राजेश पांडेय सांसद हैं। वहीँ यहाँ से 2009 में पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर यहाँ से जीत दर्ज की थी। पहले पडरौना के नाम से जाने जाना वाली इस सीट पर भजपा के राम नगीना मिश्रा ने 1999 में जीत दर्ज की थी। वहीँ 2004 में यहाँ से एनएलपी के बालेश्वर यादव ने कामयाबी हासिल की थी।

सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के गृहनगर की सीट गोरखपुर से भी सपा-बसपा का कमोबेश यही हाल रहा है। हालांकि आदित्यनाथ द्वारा मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली की गयी इस सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के प्रवीण निषाद ने जीत दर्ज कर यहाँ से सूखा ख़त्म किया। उपचुनाव में सपा प्रत्याशी को बसपा के साथ-साथ पीस पार्टी और निषाद पार्टी जैसी छोटी लेकिन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव रखने वाली पार्टियों ने भी अपना समर्थन दिया था। बता दें कि वर्ष 1989 से गोरखपुर सीट बीजेपी के पास थी। योगी आदित्यनाथ पिछले पांच बार से यहां के सांसद रहने के बाद 2017 में यूपी के सीएम बने थे। उन्होंने सीएम बनने के बाद यहां की लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

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