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देवरिया लोकसभा क्षेत्र में 1984 के बाद से नहीं खुल सका है कांग्रेस का खाता

वेद प्रकाश दुबे/राकेश मिश्रा
देवरिया: आम चुनावों की घोषणा जल्द ही हो सकती है। पार्टियों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में कांग्रेस ने पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक सभा सीटों को अपने पाले में खींचने के लिए प्रियंका गाँधी को भी मैदान में उतार दिया है। हालांकि जब हम पूर्वांचल की सीटों पर नजर डालते हैं तो यह पाएंगे की यहाँ कांग्रेस की हालत अभी बहुत खस्ता है। यहाँ पंजे को ज़माने के लिए अभी कांग्रेस के आलाकमान को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। फाइनल रिपोर्ट आज से आपक सामने पूर्वांचल की हर सीट पर कांग्रेस का कैसा प्रदर्शन रहा है उसकी एक व्याख्या लेकर सामने आएगा। इसी क्रम में

पेश है आज देवरिया सीट की रिपोर्ट–

देवरिया में अभी तक के हुये लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस ने यहां से छह बार विजय प्राप्त की है। लेकिन बड़ी बात यह है कि 1984 के बाद से यहां कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका है। देवरिया गोरखपुर से कटकर 1946 में जिला बना था। 1951 में यहाँ से कांग्रेस के प्रत्याशी विश्वनाथ राय ने जीत दर्ज की थी। 1957 के आम चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी रामजी वर्मा यहाँ से सांसद बने थे। उसके बाद से लगातार तीन बार सन 1971 तक कांग्रेस के विश्वनाथ राय जीतते रहे।

विश्वनाथ राय के जीत के सिलसिले को भारतीय लोक दल के नेता देवता मणि त्रिपाठी ने 1977 के चुनाव में तोडा। 1980 में देवता मणि यहाँ से फिर जीत दर्ज कर संसद पंहुचे। हालांकि 1984 के चुनाव में इस क्षेत्र के कद्दावर नेता राज मंगल पांडेय ने जीत दर्ज कर इस सीट पर कांग्रेस का परचम एक बार फिर लहराया। अंतिम बार कांग्रेस के राज मंगल पाण्डेय ही यहां से विजयी हुये थे। इसके बाद से यहां से कांग्रेस का कोई भी उम्मीदवार विजय प्राप्त नहीं कर सका है। 1989 में चुनाव में जीत तो एक बार फिर राजमंगल पांडेय ने ही दर्ज की लेकिन कांग्रेस के टिकट पर नहीं, बल्कि जनता दल के टिकट पर।

1991 में समाजवादी नेता मोहन सिंह ने जनता दल के टिकट पर यहाँ से जीत दर्ज की। वहीँ 1996 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कमल इस सीट पर खिला। पार्टी के नेता श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने यहाँ से जीत दर्ज की थी। 1998 में एक बार फिर मोहन सिंह यहाँ से विजयी हुए। मोहन सिंह तब समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। 1999 में एक बारे फिर भाजपा के श्रीप्रकाश मणि ने यहाँ से जीत दर्ज कर कमल खिलाया। वहीँ 2004 में यहाँ की जनता ने एक बार फिर कद्दावर समाजवादी नेता मोहन सिंह को जीता कर संसद भेजा। 2009 में यहाँ से बसपा ने जीत दर्ज की। बसपा के गोरख प्रसाद जायसवाल हाथी की सवारी कर संसद पंहुचे। 2014 की मोदी लहर में यह सीट एक बार फिर भाजपा के पास वापस आ गयी। वर्तमान में वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा यहाँ से सांसद हैं।

देवरिया संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा देवरिया, रामपुर कारखाना, पथरदेवा, फाजिलनगर और तमकुही राज आती हैं। जिसमें से एक तमकुहीराज में कांग्रेस के लल्लू सिंह विधायक हैं। बाकी चार विधानसभा क्षेत्रों पर भाजपा का ही कब्ज़ा है।

देवरिया लोकसभा क्षेत्र से मौजूदा सांसद पूर्व मंत्री भाजपा के कलराज मिश्रा हैं। यहां से भाजपा पार्टी से कई दावेदार अपनी अपनी दावेदारी दिखा रहे हैं। जिसमें कलराज के अलावा शंशाक मणि, शलभ मणि, देवेन्द्र प्रताप सिंह हैं। सपा-बसपा के गठबंधन के बाद यह देखना होगा कि यह सीट किस पार्टी के खाते में जाती है। वैसे सपा के पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर तिवारी भी यहां से अपनी दावेदारी दिखा रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी के नेता तथा 2014 के लोकसभा चुनाव में दूसरे नम्बर पर रहने वाले नियाज़ अहमद भी बसपा से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

कांग्रेस भी यहां से करीब 35 सालों का सूखा ख़त्म करने के लिए कमर कस रही है। यहां से कांग्रेस के प्रवक्ता और रुद्रपुर से पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। उनकी उपस्थिति भी देवरिया में खूब देखी जा रही है। अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खोये जनाधार को एक बार फिर से पाने के लिये कांग्रेस द्वारा प्रियंका गांधी को मैदान में उतारने का असर देवरिया लोकसभा क्षेत्र पर पड़ता है अथवा नहीं।

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