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JEE/NEET परीक्षा: राजनीतिक दावपेंच और क्या करें, क्या ना करें के बीच फंसा है देश का भविष्य

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गोरखपुर (सूर्यांश द्विवेदी): एक तरफ़ जहाँ देश मार्च महीने से ही कोरोना वायरस से लड़ रहा है वहीं दूसरी तरफ़ इस समय JEE एवं NEET के प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन को लेकर एक लंबा बहस देश मे छिड़ गया है। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा तो देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ़ कर दिया की JEE एवं NEET की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश के बाद JEE एवं NEET के परीक्षा को लेकर नए स्तर पर परीक्षा का विरोध होता दिख रहा है। सरकार का कहना है की अनलॉक की प्रक्रिया में सब सेवाएं चल रही हैं तो परीक्षा भी आयोजित किया जा सकता हैं। वहीं विपक्ष का आरोप है की सरकार प्रतियोगियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार प्रतियोगियों के जान के बदले परीक्षा लेना चाहती है। वहीं प्रतियोगियों का कहना है की लॉकडाउन के डर एवं तनाव वाले माहौल के कारण एवं शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने के कारण परीक्षा की तैयारी नही हो पाई है।

शिक्षाविदों, विशेषज्ञों मसलन IIT प्रमुख का कहना है की अगर JEE-NEET की परीक्षा में देरी होती है तो ज़ीरो ईयर होने का डर है। सरकार का तर्क है कि विपक्ष राजनीति कर रही है। विपक्ष चाहती है कि छात्रों का एक वर्ष बर्बाद हो जाए। बहरहाल JEE-NEET को लेकर देश मे गरमागरम राजनीति शुरू हो गई है।

राज्यों के तमाम मुख्यमंत्रियों द्वारा परीक्षा को रोकने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया। तो वहीं ट्वीटर एवं अन्य सोशल साइट्स पर भी JEE-NEET परीक्षा के समर्थन एवं विरोध में लोगो के विचार देखने को मिल रहे हैं। वर्तमान हालात में तमाम ऐसे प्रश्न हैं जिनका आज उत्तर ढूंढना मुश्किल दिख रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है की छात्रों के एक साल के एकेडमीक ईयर को बर्बाद होने से कैसे बचाया जाए? जिन अभ्यर्थियों की उम्र इस साल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ख़त्म हो रही है सरकार उन्हें किस प्रकार से अनुतोष प्रदान करेगी? क्या सरकार उन्हें अगले वर्ष भी परीक्षा देने की छूट प्रदान करेगी?

प्रश्न यह भी है कि डर और तनाव के माहौल में जहाँ शैक्षणिक संस्थान जैसे कोचिंग आदि बंद थे। वैसे प्रतियोगियों की परीक्षा की तैयारी किस प्रकार से हुई होगी? सवाल और भी हैं जहाँ देश मे प्रतिदिन 70,000 से अधिक केसेज़ आ रहे हैं वहाँ प्रतियोगियों में परीक्षा के दौरान संक्रमण न होने की क्या संभावना है?

इतने संख्या में छात्रों के बीच सोशल डिस्टेंसिग का पालन किस प्रकार से सुनिश्चित होगा जहाँ हाल में ही उत्तर प्रदेश में B.ed परीक्षा के दौरान तमाम अव्यवस्थाएं देखने को मिली। सवाल बहुत हैं लेकिन सवाल का जबाब देने वाला कोई नही है। अक़्सर जरूरी सवाल बहस और मुद्दों में उलझकर रह जाते हैं। लेकिन JEE-NEET के परीक्षा को लेकर गरमाए राजनीति के बीच मे छात्रों के चिताओं और सरकार के व्यस्थाओं पर सवाल जबाब जरूरी है।

जरूरी यह भी है छात्रों का एक साल बर्बाद न हो और जरूरी यह भी है की कोरोना काल में परीक्षा के वजह से छात्रों का जान जोखिम में न पड़े। सवाल करते रहिए जिम्मेदारों से, व्यवस्था बनाने वालों से, नीति नियंताओ से। लोकतंत्र में जनता का सबसे मुख्य कार्य है उत्तरदायी लोगों से सवाल करना। सवाल करेंगे तभी जबाब मिलेगा, सवाल करेंगे तभी लोकतंत्र निखरेगा, सवाल करेंगे तभी जबाब में देश सही मायनों में उन्नति एवं विकास के मार्ग पर अग्रसर होगा।

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