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गोरखपुर: घर-घर पहुंच रही स्टेशनरी, लॉक डाउन में Chaubey Jee Book Mart ने की लोगों की मुश्किल आसान

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गोरखपुर: कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोगों को पूर्णबंदी का पालन करना है लेकिन इस दौरान घर की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती है। गोरखपुर प्रशासन ने इसका हल खोजा और शहर में लोगों को घर बैठे सुविधा पहुंचानी शुरू कर दी। जिला प्रशासन ने ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की, जिसमें शहर की स्टेशनरी की दुकान से लेकर प्लम्बर और इलेक्ट्रिशियन तक का नम्बर है। जरूरत पड़ने पर लोग सम्पर्क करते हैं और उनके यहां डिलीवरी हो जाती है।

इस मॉडल की केन्द्र और दूसरे राज्यों की सरकारों ने काफी तारीफ की है। कई जगह इसे लागू करने की तकनीक भी पूछी जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के गृहजनपद गोरखपुर में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम से अभी तक 22 हजार से ज्यादा लोगों तक कापी किताब और अन्य स्टेशनरी समान पहुंचा है.

पूर्णतया बंदी घोषित होने के बाद लोगों के सामने जरूरी सामानों का संकट गहराने लगा, तब गोरखपुर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल की अनूठी पहल ने जरूरी सामानों की आपूर्ति करवाकर व्यवस्था को सुधार दिया। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने 10 ऑनलाइन पोर्टल चलाकर लोगों के घरों तक खाद्यान्न की डिलीवरी सुनिश्चित करा दी।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया, “लॉकडाउन 2 जब शुरू हुआ तो लोगों के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गयी। उनके सामने बच्चों की स्टेशनरी की दिक्कत थी वे लोग हमें फोन कर रहे थे। उसी को देखते हुए हमने स्टेशनरी और किताबों को उपलब्ध कराने के लिए शहर के 116 सीबीएसई, 16 आईसीएसई, 153 माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों को जोड़ा और 14 डिस्ट्रीब्यूटर और पोर्टल से ताल-मेल कर सभी 8 जोन को मैप करा दिया। इससे लोगों की समस्या काफी दूर हो गयी। करीब 22 हजार लोगों तक स्टेशनरी पहुंच गये हैं, 3 मई तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा हमने सर्विस ऑन डिमांड शुरू किया है। जिसके अर्न्तगत मैकेनिक, प्लम्बर, इलेक्ट्रेशियन करीब 800 लोगों को मैप कर दिया है। यह घर बैठे ही आपको सारी सर्विस देंगे। अभी हमारे 12 पोर्टल है। अभी तक हमने जिले में राशन, फल सब्जी, दूध का करीब 3 लाख 50 हजार आर्डर पूरा किया है।”

उन्होंने बताया, “डिलीवरी के समय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। डिलीवरी करने वाले को मास्क, ग्लव्स व टोपी पहनना अनिवार्य है। सुबह व शाम को उनका तापमान जांचा जाता है। हमारे गोरखपुर मॉडल की हर जगह तरीफ हो रही है। इसको कई राज्यों में मांगा जा रहा है। इसका प्रजेंटेशन दिल्ली, झारखण्ड, असम, केरल, राजस्थान के अलावा यूपी के अन्य जिलों में भी यह मॉडल मांगा जा रहा है। स्टेशनरी मॉडल को लेकर कई जिलों से जानकारी मांगी गई है, उन्हें प्रेजेंटेशन भेजा गया है। कई राज्यों सहित भारत सरकार के पेट्रोलियम, वाणिज्य, स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय को प्रेजेंटेशन भेजा जा चुका है।”

गोरखपुर के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने आईएएनएस को बताया कि जब लॉकडाउन किया गया था। उसके बाद से हमने ‘गोरखपुर मॉडल’ शुरू किया था। सभी को घर बैठे सुविधा दी जा रही है। इसमें जरूरत के करीब 14 समान रखे गये थे। लोग हमें फोन, व्हाट्सएप और हमारे पोर्टल के माध्यम से लोग आर्डर दे सकते हैं। पूरे शहर को 8 जोन में बांट कर उसकी हर दुकान को मैप कर लिया, दूध, फल, सब्जी अन्य समान को भी पोर्टल से लिंक करा दिया। इसमें कोई भी डिलीवरी चार्ज नहीं देना है। जिला प्रशासन ने जो रेट तय किया है। उसी के तहत समान दिया जा रहा है।”

शहर के बक्सीपुर स्थित चौबे जी बुक मार्ट के ओनर ओम चौबे ने बताया कि इस लॉक डाउन के दौर में जहाँ स्वास्थ्यकर्मी, पुलिस, मीडिया के लोग अपनी जान की बाजी लगा कर जनता की सेवा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे में उनका भी फर्ज बनता है कि लोगों के लिए कुछ किया जाए। यही कारण है कि वो सरकार द्वारा बताये गए तमाम मानकों का पालन करते हुए लोगों के घर तक किताबें, स्टेशनरी, नावेल सब कुछ पंहुचा रहे हैं।

श्री चौबे ने बताया कि वो इस लॉक डाउन में लोगों की छोटी बड़ी हर डिमांड को पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं। वो बताते हैं कि वो लोग शहर के सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक होम डिलीवरी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक पुस्तक विक्रेता होने के नाते उनका फर्ज है कि किसी भी विद्यार्थी का भविष्य पुस्तक के अभाव में ना ख़राब हो। उन्होंने बताया कि उनकी कोशिश है कि ना केवल गोरखपुर बल्कि अन्य जिलों के निवासियों तक भी जरुरत की किताबें, स्टेशनरी पंहुचा दी जाए। इसके लिए वो दूसरे जिलों के दुकानों से टाई उप कर के लोगों के घरों तक किताब, कॉपी की होम डिलीवरी सुनिश्चित करवा रहे हैं।

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