फाइनल रिपोर्ट स्पेशल

परंपरागत संसांधनों से देंगे कोरोना को मात

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नोएडा(डॉ अमित कुमार पांडेय): मानव सभ्यता की स्थापना के बाद से, स्वास्थ्य सभी के लिए मुख्य चिंता का विषय रहा है। पहले मानव पूरी तरह से प्रकृति पर निर्भर था। लेकिन समय के साथ स्वास्थ्य देखभाल एक महत्वपूर्ण जरूरत बन गई। भारत को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से नवाजा गया है, जिन्हें प्रकृति का आशीर्वाद माना जाता है। विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक चिकित्सा में विभिन्न प्रजातियों की उपलब्धता का उपयोग किया जा रहा है।

त्रेता युग में, जब लक्ष्मण मेघनाद के तीर के बाद बेहोश हो गए, तो वे मृत्यु के निकट थे और भगवान राम की सेना के लिए एक बड़ा झटका था। राम ने श्रीलंका के वैद्य सुषेण से बेहोश लक्ष्मण का इलाज करने का अनुरोध किया। वैद्य सुषेण आयुर्वेद के विशेषज्ञ थे और अपने बौद्धिक ज्ञान से श्रीलंकाईयों का इलाज करते हुए भगवान हनुमान को द्रोणागिरि पहाड़ियों में भाग लेने और चार पौधे अर्थात् मृतसंजीवनी, विशालाकराणी, संधानकर्णी और सवरनयारानी को इकट्ठा करने के लिए कहा।

इसके अलावा, हिमालयन रेंज में अधिकांश जड़ी-बूटियों की खोज की गई है और उनमें से कई अभी भी घातक बीमारियों के इलाज में प्रयोग में लाई जाती है। वर्तमान परिदृश्य में जब कोविद -19 एक चुनौती बन गया है और पूरी दुनिया इस बीमारी के टीके के लिए शोध कर रही है, भारत में आयुर्वेद में उपलब्ध संसाधनों के साथ कोरोना पॉजिटिव रोगियों का इलाज किया जा रहा है।

हमारी परम्परागत चिकित्सा विज्ञान किसी भी बिमारी को फैलने से पहले उसको रोकने पर कार्य करती थी। सदियों से आयुर्वेद में उपलब्ध औषधियां लोक कल्याण के काम में लाई जाती है। कोरोना को हम थोड़ी सी सावधानी और सामाजिक दूरियों को बढ़ा कर इसके प्रसार पर लगाम लगा सकते है। भारत अब तक इस लड़ाई में विश्व समुदाय के सामने एक अग्रज के रूप में खड़ा है।

आयुर्वेदाचार्य डॉ कृष्ण बिहारी पांडेय के अनुसार,”अदरक, काली मिर्च, दालचीनी, लहसन और हल्दी का सेवन आपके प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएगा और आप के गले में पनप रहे किसी भी प्रकार के सूखापन या इन्फेक्शन को रोकने में मददगार साबित होगा। अतः इसके सेवन को बढ़ाकर आप इस बिमारी के फैलने या पनपने की प्रवृति पर रोक लगा सकते है।”

थोड़ी सी सावधानी आपको कोरोना वायरस के प्रकोप से बचा सकती है। त्रेता युग से लेकर आज तक परम्परागत औषधियों ने तमाम तरह के व्याधियों से मुक्ति दिलाई। अतः समय के अनुसार इनका प्रयोग होना चाहिए। आइये संकल्प लेते है की विश्व पर आये इस संकट का मुकाबला हम डट कर करेंगे और भारत को कोरोना मुक्त बनाएंगे।

(डॉ अमित कुमार पांडेय एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा के एमिटी बिज़नेस स्कूल में प्रोफेसर हैं)

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