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गोला: जिस जमीन पर पुलिस ने रोका था निर्माण, कुछ दिन बाद दबंगों ने वहीँ कराया अस्थायी निर्माण

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गोरखपुर (राकेश मिश्रा/बी एन तिवारी): लगभग रोज हम लोगों के सामने जमीन सम्बन्धी विवाद सामने आ रहे हैं। कुछ में तो हत्या तक हो जा रही है। लेकिन फिर भी पुलिस-प्रशासन ऐसे मुद्दों को तब गंभीरता से लेता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। अब एक ऐसा ही मामला गोला तहसील में सामने आया है। जिसमे पुलिस ने जिस जमीन पर पीड़ित के कहने पर कुछ लोगों को कुछ ही दिन पहले साफ़ सफाई और निर्माण करवाने से रोका था। उसी जमीन पर दबंगों ने अब अस्थायी निर्माण करवा लिया है।

उक्त जमीन पर निर्माण कार्य भी दिन में नहीं हुआ। वो हुआ रात के 2.30 बजे। ताज्जुब यह था कि जब पीड़ित पक्ष के लोग मौके पर पंहुचे तो वहां 112 नंबर की दो गाड़ियां पहले से ही मौजूद थी। मतलब यह कि जो लोग दबंगई से अस्थायी निर्माण करवा रहे थे उन लोगों ने ही पुलिस को भटकाने के उद्देश्य से गलत सुचना देकर पहले ही पुलिस बुला ली थी।

(जमीन पर दबंगों द्वारा कराया गया अस्थायी निर्माण)

जानकारी के मुताबिक शेषनाथ मिश्र गोला क्षेत्र के गाँव भरसी बुजुर्ग के निवासी हैं। उनकी कुछ जमीन बरहजपार माफ़ी, निकट डड़वापार चौराहा में है। उक्त जमीन का कुछ हिस्सा 1989 में शेषनाथ की मिश्र के पिता स्व रामशंकर मिश्र ने अपने ही गाँव के पारस नाथ मिश्र और राम सकुल को बेच दी थी। उस सौदे में शेषनाथ मिश्र भी एक गवाह थे।

शेषनाथ मिश्र ने Final Report से बात करते हुए बताया कि शनिवार सुबह उनके पास गांव के ही एक व्यक्ति ने फ़ोन कर सुचना दी कि उनकी जमीन रकबा नंबर 767 पर कुछ लोगों द्वारा अस्थायी निर्माण करवाया जा रहा है। शेषनाथ उस समय गोरखपुर में थे। वो तुरंत अपने कुछ रिश्तेदारों के साथ मौके पर पंहुचे। वहां उन्होंने देखा कि पारस नाथ एक अस्थायी निर्माण करवा रहे थे और 112 नंबर की दो गाड़ियां पहले से ही मौजूद थीं।

उन्होंने बताया कि जिस जमीन को पारस नाथ मिश्र को बेचीं गयी थी वो एक बड़ी जमीन का कुछ हिस्सा भर है। पूरी जमीन के बगल से ही कौड़ीराम-गोला रोड गयी है। उन्होंने बताया कि जो जमीन पारस नाथ को बेची गयी थी वह रोड से बहुत अंदर की जमीन है। उन्होंने बताया कि जो जमीन पारस नाथ को बेचीं गयी है उसके उत्तर तरफ चकनाली और तुलसी पांडेय का खेत है। पश्चिम और दक्षिण तरफ स्व रामशंकर मिश्र का खेत है।

(जमीन पर दबंगों द्वारा कराया गया अस्थायी निर्माण)

शेषनाथ मिश्र ने बताया कि अब चुकि रोड के किनारे की जमीन की कीमत बढ़ गयी है इसलिए पारस नाथ की नियत ख़राब हो गयी है और वो रोड के किनारे की जमीन पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से अस्थायी निर्माण करवा चुके हैं। शेषनाथ ने कहा कि आखिर क्या मामला है कि जो जमीन 1989 में बेचीं गयी उस पार आज 31 साल बाद पारस नाथ को निर्माण कराने की तेजी आयी और वो भी वहां नहीं जहाँ उनका कब्ज़ा है।

उन्होंने पुलिस-प्रशासन से अनुरोध किया कि इस मामले को जल्द से जल्द देखें अथवा पारस नाथ कुछ स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से फिर एक बार निर्माण करवा सकते हैं।

बताया जा रहा है कि जब इस मामले में शेषनाथ मिश्र के रिश्तेदारों ने पुलिस से कार्यवाही करने को कहा तब उल्टे हल्का दरोगा ने शेषनाथ मिश्र के रिश्तेदारों की धारा 151 के अंतर्गत चालान करने की धमकी दे डाली।

क्या कहना है पुलिस का

जब इस मामले में हमारे गोला संवाददाता ने गोला क्षेत्राधिकारी संतोष सिंह से बात की तो उनका कहना था कि इस मामले का पुलिस से विशेष कुछ लेना देना नहीं है। पुलिस बस इस बात का ध्यान रखेगी की सम्बंधित जमीन के नाते कोई कानून व्यवस्था ख़राब होने की स्थिति न आये। उन्होंने कहा कि यह मामला राजस्व विभाग का है और सम्बंधित कर्मचारी और अधिकारी दोनों पक्षों की और पुलिस उपस्थिति में पैमाइश करवा कर उचित फैसला कर देंगे।

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