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फीस मुद्दे को लेकर अभिभावकों के एक प्रतिनिधिमण्डल ने की प्रशासन से मुलाकात

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गोरखपुर (राकेश मिश्रा): फीस मुद्दे को लेकर अभिवावकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने एसडीएम गौरव सिंह सोगरवाल से मुलाकात कर इस कोरोना महामारी के दौर में स्कूलों को न्यूनतम फीस लेने का आदेश देने का आग्रह किया। यह प्रतिनिधि मंडल जिला विद्यालय निरीक्षक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह भदौरिया के कार्यालय भी गया।

‘अपना गोरखपुर’ के अध्यक्ष नितिन जायसवाल के नेतृत्व में इस प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात के दौरान अभिवावकों ने स्कूलों के द्वारा जिलाधिकारी के 5 अप्रैल के आदेश के बाद भी एडमिशन व मासिक शुल्क जमा करने के लिये अभिभावकों के ऊपर दबाव के बारे में शिकायत दर्ज करवायी।

उन्होंने बताया कि सिविल लाइन्स स्थित एक स्कूल तो जो अभिभावक अभी फीस जमा नहीं कर पा रहे हैं, उनको बुक्स व स्टेशनरी भी नहीं दे रहे हैं। यहाँ तक कि ऑनलाइन क्लास भी नहीं करने दे रहे हैं। जिससे बच्चों का भविष्य अन्धकारमय होते जा रहा है।

पेरेंट्स का कहना था कि उक्त स्कूल गैरकानूनी रूप से बुक्स व स्टेशनरी भी अपने यहाँ से ही बेच रहा है। बच्चे किसी भी कीमत पर बुक्स बाहर से नहीं खरीद सकते हैं। उनका कहना था कि एक तरह से स्कूल दादागिरी पर उतर आया है और प्रशासन का कोई डर नहीं है।

डीएम गोरखपुर के आदेशानुसार कोई भी स्कूल फीस ना जमा करने के कारण, किसी भी छात्र का नाम नहीं काट सकता व ऑनलाइन क्लास से वंचित नहीं कर सकता है और अभिभावकों के ऊपर दबाव नहीं बना सकता। अप्रैल-मई-जून की फीस को अगले महिनों की फीस में समायोजित करना होगा।

अभिवावकों का कहना था कि गोरखपुर के ज्यादातर स्कूल अपने वेबसाइट पर शिक्षकों का डिटेल उनकी शैक्षिक योग्यता, क्लास-वार फीस, बच्चों की संख्या, बैलेन्सशीट, बुक्स व पब्लिशर्स की डिटेल आदि भी ना ही पोस्ट करते हैं और ना ही अपडेट करते हैं।

उन्होंने उप-जिलाधिकारी से बताया कि लाॅक डाउन में ज्यादातर अभिभावकों का व्यापार बन्द रहा है और कई तो बर्बादी की कगार पर हैं। कई कर्मचारियों की नौकरी या तो चली गयी है या फिर उनका वेतन कम करके मिल रहा। जिसके कारण स्कूल की पूरी फीस व एडमिशन शुल्क देने में असमर्थ हैं। कई स्कूल अपने शिक्षकों को आधा वेतन दे रहे हैं, लेकिन अभिभावकों से पूरा फीस ले रहे हैं।

उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में जब तक कोविड-19 के कारण लाॅक डाउन चल रहा है, स्कूलों को अभिभावकों की समिति के साथ बातचीत कर के, पारदर्शी रूप से शिक्षकों व स्टाफ के न्यूनतम वेतन व अन्य खर्चों का ही शुल्क अभिभावकों से लेना चाहिये, जो कि 1000-1500 के बीच में होगा।

उप-जिलाधिकारी गौरव ने अभिवावकों की बातों को गम्भीरता से सुना और आगे की कार्यवाही के लिये आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल में ‘अपना गोरखपुर स्कूल एशोसिएशन’ के नितिन कुमार जायसवाल, राजीव शुक्ला, अमित सिंह पटेल आदि ने अपनी बात रखी।

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