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नेपाली नदियों के उफान से महराजगंज के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ा

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गोरखपुर (अरविंद श्रीवास्तव): मूसलाधार बारिश से उत्तर प्रदेश ही नहीं नेपाली नदियों का भी जलस्तर बढ़ने लगा है और जब जब नेपाली नदियों का मुंह खोला जाता है उत्तर प्रदेश व बिहार की सरकार और किसानों के चेहरों की रंगत बदल जाती है।

नेपाल के पहाड़ी नदियों का भारतीय क्षेत्र में बहने वाली पहाड़ी नदियों पर स्पष्ट तौर पर असर दिखने लगा है। महराजगंज का महाव नाला भी खतरे के निशान से तीन फिट ऊपर बह रहा है। महाव नाले के किनारे कब टूट जाए, कहा नहीं जा सकता। सिंचाई विभाग के जिम्मेदार बाढ़ बचाव के लिए जुटे हुए हैं।

रविवार को अचानक दो बजे महाव नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। अपराह्न 4 बजे महाव का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। इससे लेकर महाव नाले के किनारे बसने वाले गांव के किसानों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ कन्ट्रोल रूम के अनुसार महाव नाले में खतरा का निशान पांच फिट है। जबकि महाव नाला तीन फिट ऊपर बह रहा है।

सिंचाई विभाग बाढ़ खंड के एक्सईएन धर्मेन्द्र कुमार ने तत्काल महाव नाले का निरीक्षण किया। बताया कि पहाड़ पर बारिश हो रही है। महाव का जलस्तर बढ़ा है। जंगल से ऊपर नाले की सफाई कराई गई है। जंगल में नाले की सफाई न होने से खतरा बना हुआ है। फिलहाल, बाढ़ बचाव की तैयारी पूरी है। महाव नाले सहित सभी नदियों की निगरानी तेज कर दी गई है। बांध पर विभागीय जिम्मेदारों ने पेट्रोलिंग शुरू कर दी है। 

सभी नदियों का जलस्तर बढ़ा
बाढ़ कन्ट्रोल रूम के अनुसार रविवार की शाम चार बजे जहां गंडक नदी में 90600 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया। वहीं राप्ती नदी में 77.930 मीटर, रोहिन नदी में 80.160 मीटर, चंदन नदी में 100.70 मीटर, प्यास नदी में 102.50 मीटर और महाव नाले में 8 फिट पानी रिकार्ड किया गया। रविवार को 54 एमएम बारिश हुई है।

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